राजसमंद। “जो बांटा जाता है वो प्रसाद होता है और जो बटोरा जाता है वो विषाद होता है” — यह अमृतमय वचन साध्वी सुहृदय गिरि ने श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ के षष्ठम दिवस पर कहे। उन्होंने कहा कि जीवन में बांटने की भावना ही ईश्वर की कृपा को आकर्षित करती है। जो मनुष्य बांटता है, वह सदा प्रसन्न रहता है, जबकि जो बटोरता है, वह सदा विषाद में डूबा रहता है।

साध्वी सुहृदय गिरि ने अपने उद्बोधन में कहा कि बांटने और बटोरने में बहुत बड़ा अंतर है, और यह कला हमें संतों से सीखनी चाहिए। संत अपने लिए नहीं, अपनों के लिए जीते हैं। उन्होंने कहा कि बिच्छू अपना स्वभाव नहीं छोड़ सकता, वैसे ही संत अपने दयाभाव और त्याग को कभी नहीं छोड़ते।

उन्होंने समझाया कि सूक्ष्म अहंकार भी मनुष्य के ज्ञान को नष्ट कर देता है। जो व्यक्ति अपने ज्ञान और कीर्ति पर गर्व करने लगता है, उसका पतन निश्चित होता है। कपटी और छलपूर्ण व्यक्ति को भगवान भी पसंद नहीं करते, क्योंकि भगवान का आशीर्वाद उसी को मिलता है जो सहज, सरल और निष्कपट होता है।
साध्वी सुहृदय गिरि ने समाज में स्त्री के सम्मान और मर्यादा पर भी गहन प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्त्री प्रकृति का रूप है, उसे श्रृंगारित अवश्य होना चाहिए, परंतु अपने संस्कार और मर्यादा को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। जहां मर्यादा और संस्कार होते हैं, वहां स्वतः सम्मान उत्पन्न होता है, और जहां सम्मान होता है वहां जीवन की अनेक समस्याएं स्वतः समाप्त हो जाती हैं।
कथा के दौरान साध्वी जी ने विद्या और अविद्या की तुलना करते हुए माता सीता को विद्या और सुपर्णखा को अविद्या की संज्ञा दी। उन्होंने नवधा भक्ति के नौ रूपों — श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य और आत्मनिवेदन — की सुंदर व्याख्या करते हुए बताया कि जो भी भक्त इनमें से किसी एक भक्ति को भी हृदय से अपनाता है, वह परमात्मा के निकट पहुंच जाता है।
कथा के प्रारंभ में व्यास पीठ का पूजन चंदन सिंह आसोलिया, पुष्पा आसोलिया, तारा वैष्णव, मोहनदास वैष्णव, गिरीश अग्रवाल और राजकुमारी अग्रवाल ने किया।
इस अवसर पर मीठालाल शर्मा, संपतलाल लड्ढा, नगर परिषद की पूर्व अध्यक्ष आशा पालीवाल, मंजू मुद्गल, अनुराधा लड्ढा, पुष्पा साहू, राधा गौड़, माहेश्वरी महिला मंडल अध्यक्ष कृष्णा लड्ढा, कैलाश वैष्णव, सुशील बड़ाला सहित सैकड़ों श्रद्धालु कथा श्रवण का लाभ लेने पहुंचे।
साध्वी सुहृदय गिरि ने जटायु और शबरी प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि जटायु ने अपने प्राणों की आहुति देकर धर्म की रक्षा की, वहीं शबरी ने अपने समर्पण और सच्ची भक्ति से भगवान श्रीराम को अपने प्रेम से जीत लिया। दोनों प्रसंग यह संदेश देते हैं कि भगवान आडंबर नहीं, भावना को स्वीकार करते हैं।

श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ का यह दिव्य आयोजन श्रद्धा, भक्ति और संस्कृति का संगम बना हुआ है। सैकड़ों श्रद्धालु प्रतिदिन कथा श्रवण कर अपने जीवन को धन्य बना रहे हैं।
कार्यक्रम के अंत में साध्वी सुहृदय गिरि ने बताया कि श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ की पूर्णाहुति शुक्रवार को की जाएगी, जिसके पश्चात भव्य भंडारे का आयोजन भी होगा।
🕉️ मुख्य संदेश:
“जो बांटता है, वही प्रसन्न रहता है; और जो बटोरता है, वही दुखी होता है।”
– साध्वी सुहृदय गिरि
नितिन सिंह/ वीबीटी न्यूज/ 25 अक्टूबर 2025
