रियांबड़ी (नागौर)।
आज के दौर में जहां शादियों में फिजूलखर्ची, दिखावा और संसाधनों की बर्बादी आम बात हो गई है, वहीं नागौर जिले के रियांबड़ी क्षेत्र के रूणवाल परिवार ने एक ऐसी पहल की है, जो समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है। इस परिवार ने अपने बेटे की शादी के निमंत्रण को कागज की जगह सूती रुमाल पर छपवाकर ‘जीरो वेस्ट वेडिंग’ का शानदार उदाहरण पेश किया है।
यह निमंत्रण कार्ड केवल शादी में बुलावा देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मेहमानों के लिए एक उपयोगी और यादगार उपहार बन गया है, जो जीवनभर उनके काम आ सकेगा।
🌿 पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम
आज भारत में हर साल लाखों शादियां होती हैं, जिनमें हजारों टन कागज केवल निमंत्रण कार्डों के रूप में खर्च हो जाता है। शादी के बाद यही कार्ड कचरे में फेंक दिए जाते हैं, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान होता है।
रूणवाल परिवार ने इसी समस्या को समझते हुए यह निर्णय लिया कि वे अपनी शादी को पर्यावरण के अनुकूल बनाएंगे। इसके लिए उन्होंने पारंपरिक कागजी कार्ड की जगह कपड़े से बने रुमाल पर निमंत्रण छपवाने का निर्णय लिया।
यह पहल न केवल कागज की बर्बादी रोकती है, बल्कि पेड़ों की कटाई पर भी रोक लगाने में मदद करती है।
🙏 धार्मिक भावनाओं का भी रखा गया सम्मान
संतोष शिक्षण समूह के निर्देशक श्यामसुंदर रूणवाल ने बताया कि अक्सर शादी के कार्डों पर भगवान गणेश, देवी-देवताओं और धार्मिक प्रतीकों के चित्र छपे होते हैं। शादी के बाद ये कार्ड कचरे में या पैरों में आ जाते हैं, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है।
उन्होंने कहा,
“हम नहीं चाहते थे कि हमारे निमंत्रण पत्रों के साथ ऐसा हो। इसलिए हमने ऐसा विकल्प चुना, जिससे सम्मान भी बना रहे और उपयोग भी हो।”
रुमाल पर छपा कार्ड न तो कचरे में जाता है और न ही अपमानित होता है।
🧼 धोते ही मिट जाएगी स्याही, बनेगा साधारण रुमाल
इस अनोखे कार्ड की सबसे बड़ी खासियत इसमें इस्तेमाल की गई अस्थायी स्याही है।
इसकी विशेषताएं:
कार्ड पर विशेष वॉशेबल इंक का प्रयोग
दो बार धोने पर पूरी लिखावट साफ
बाद में साधारण रुमाल की तरह उपयोग
मेहमान शादी के बाद इसे धोकर रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल कर सकते हैं। इस तरह यह कार्ड वर्षों तक उनके काम आता रहेगा।
🗑️ कूड़ेदान में पड़े कार्डों ने बदला नजरिया
इस अनूठी पहल की शुरुआत एक भावुक घटना से हुई।
गुलाबचंद रूणवाल ने एक सुबह अपने घर के बाहर कूड़े के ढेर में फटे हुए शादी के कार्ड देखे, जिन पर देवी-देवताओं के चित्र बने थे।
यह दृश्य देखकर उनका मन व्यथित हो उठा। उन्होंने महसूस किया कि लोग अनजाने में आस्था और पर्यावरण दोनों का अपमान कर रहे हैं।
यहीं से उनके मन में यह विचार आया कि वे अपने पोते की शादी में ऐसा नहीं होने देंगे।
📉 कागज की बर्बादी और पेड़ों की कटाई पर रोक
विशेषज्ञों के अनुसार, एक औसत शादी में लगभग 500 से 1000 निमंत्रण कार्ड छपते हैं। इसके लिए बड़ी मात्रा में कागज और पेड़ों की कटाई होती है।
यदि हर शादी में इस तरह कागजी कार्ड छपते रहें, तो आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
रूणवाल परिवार ने इस बर्बादी को रोकने के लिए रीयूजेबल कार्ड का विकल्प अपनाया।
🤔 रुमाल ही क्यों चुना गया?
जब परिवार ने कागज के विकल्प पर विचार किया, तो उन्होंने ऐसा उत्पाद ढूंढा जो:
सभी के काम आए
लंबे समय तक उपयोगी हो
पर्यावरण के अनुकूल हो
आसानी से उपलब्ध हो
इन सभी बातों पर खरा उतरने वाला विकल्प था — सूती रुमाल।
रुमाल हर व्यक्ति की दैनिक जरूरत है, इसलिए यह सबसे उपयुक्त माध्यम साबित हुआ।
🖨️ स्क्रीन प्रिंटिंग और विशेष स्याही का प्रयोग
इन कार्डों को तैयार करने के लिए आधुनिक स्क्रीन प्रिंटिंग तकनीक का उपयोग किया गया।
तकनीकी विशेषताएं:
वाटर-सॉल्युबल इंक
पर्यावरण-अनुकूल स्याही
कपड़े पर सुरक्षित प्रिंटिंग
आसानी से धुलने योग्य
इस तकनीक से बने कार्ड न तो कपड़े को नुकसान पहुंचाते हैं और न ही पर्यावरण को।
📢 कार्ड पर छपा खास संदेश
हर रुमाल पर एक प्रेरणादायक संदेश भी छापा गया:
“शादी के बाद इसे धोकर उपयोग करें, पर्यावरण बचाएं।”
यह संदेश मेहमानों को भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करता है।
🌍 सोशल मीडिया पर जमकर हो रही तारीफ
रूणवाल परिवार की इस अनोखी पहल की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। लोग इस ‘इको-फ्रेंडली कार्ड’ की जमकर सराहना कर रहे हैं।
कई लोगों ने इसे “भविष्य की शादियों का मॉडल” बताया है।
🌱 पर्यावरणविदों की राय
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि:
यदि भारत की केवल 10% शादियां भी इस मॉडल को अपनाएं, तो हर साल लाखों टन कागज की बचत हो सकती है।
इससे:
जंगल सुरक्षित रहेंगे
कचरा कम होगा
कार्बन उत्सर्जन घटेगा
पर्यावरण संतुलन बना रहेगा
🌟 समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनी पहल
रूणवाल परिवार की यह पहल साबित करती है कि बदलाव छोटे कदमों से ही शुरू होता है। यदि हर परिवार अपनी शादी में थोड़ा सा भी पर्यावरण का ध्यान रखे, तो देश में बड़ा परिवर्तन संभव है।
यह पहल आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, सुरक्षित और हरित भविष्य देने की दिशा में मजबूत कदम है।
