March 2, 2026
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नागौर जिले के थांवला कस्बे में शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व इस वर्ष 22 सितंबर से प्रारंभ हो रहा है। यह उत्सव 1 नवंबर तक भक्तिमय वातावरण में मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व होता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दौरान थांवला क्षेत्र के मंदिरों और घरों में धार्मिक अनुष्ठान, व्रत-पूजन और विशेष आयोजन देखने को मिलेंगे।

विधि-विधान और शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्र 22 सितंबर, सोमवार से शुरू हो रहे हैं। घटस्थापना के लिए इस दिन दो प्रमुख शुभ मुहूर्त हैं –

  • प्रथम मुहूर्त: सुबह 6:09 बजे से 8:06 बजे तक
  • द्वितीय (अभिजीत) मुहूर्त: 11:49 बजे से 12:38 बजे तक

इन दोनों में से किसी भी शुभ मुहूर्त में घटस्थापना की जा सकती है। इसके अलावा चौघड़िया मुहूर्त के अनुसार, सुबह 9:22 बजे से 10:53 बजे तक ‘शुभ’ तथा दोपहर 1:55 बजे से शाम 6:28 बजे तक ‘लाभ एवं अमृत’ चौघड़िया में भी घटस्थापना की जा सकेगी।

देवी के आगमन का महत्व

इस बार नवरात्रि सोमवार से शुरू हो रही है। ऐसे में धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता रानी के आगमन की सवारी ‘हाथी’ मानी गई है। हाथी पर माता का आगमन शुभ और जगत कल्याणकारी माना जाता है। श्रद्धालु इस संयोग को अत्यंत मंगलकारी मान रहे हैं और घर-घर विशेष तैयारियां हो रही हैं।

विजयदशमी (दशहरा) 2 अक्टूबर को

शारदीय नवरात्रि का समापन विजयदशमी के दिन, यानी 2 अक्टूबर 2025 को होगा। इस दिन देशभर में रावण दहन और विजयदशमी की परंपराएं निभाई जाएंगी।
श्रीमददेवी भागवत महापुराण के अनुसार, विजयदशमी जिस दिन पड़ती है, उसी के अनुसार मां दुर्गा के प्रस्थान का वाहन निर्धारित होता है।

  • रविवार और सोमवार को विजयदशमी होने पर मां का प्रस्थान ‘भैंसे’ पर होता है, जो शोकदायक माना जाता है।
  • मंगलवार और शनिवार को माता का वाहन ‘मूर्गा’ होता है, जिसे अशुभ माना जाता है।
  • बुधवार और शुक्रवार को माता ‘हाथी’ पर जाती हैं, जिसे शुभवृष्टि का द्योतक माना जाता है।
  • गुरुवार को विजयदशमी होने पर माता का वाहन ‘मनुष्य’ होता है, जो सुख-शांति और सौभाग्य देने वाला माना गया है।

इस बार 2 अक्टूबर 2025 गुरुवार को विजयदशमी पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता दुर्गा का प्रस्थान इस बार मनुष्य की सवारी पर होगा, जिससे लोगों के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का संयोग बनेगा।

समय अत्यंत भाग्यशाली

इस बार नवरात्र और विजयदशमी का संयोग भक्तों के लिए शुभ और कल्याणकारी संकेत लेकर आया है। धार्मिक जानकारों का मानना है कि इस अवधि में किए गए धार्मिक कार्य, दान-पुण्य और अनुष्ठान विशेष फलदायी होंगे।

थांवला और आस-पास के क्षेत्रों में मंदिरों को आकर्षक रोशनी और फूलों से सजाया जाएगा। घर-घर में माता रानी के जयकारे गूंजेंगे और भव्य कलश स्थापना से भक्तिमय वातावरण बनेगा।

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