नई दिल्ली ।कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बड़ा और बेबाक बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विदेश नीति किसी एक राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि पूरे देश की होती है। थरूर ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति प्रधानमंत्री की हार पर खुश होता है, तो वह वास्तव में भारत की हार का जश्न मना रहा होता है।
एक इंटरव्यू के दौरान शशि थरूर ने पंडित जवाहरलाल नेहरू के ऐतिहासिक कथन का उल्लेख करते हुए कहा, “अगर भारत मरेगा, तो कौन जिएगा?”। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हितों के मुद्दों पर राजनीति से ऊपर उठकर सोचने की आवश्यकता है, क्योंकि देश की सुरक्षा और वैश्विक प्रतिष्ठा सर्वोपरि है।
पाकिस्तान की बदली सैन्य रणनीति पर चिंता
शशि थरूर ने पाकिस्तान से उभरते सुरक्षा खतरों को लेकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी सैन्य रणनीति में लगातार बदलाव कर रहा है और अब वह हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक तथा स्टेल्थ हमलों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है। थरूर के अनुसार, यह भारत के लिए एक गंभीर चुनौती है, जिसे किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने बताया कि पाकिस्तान पहले ही ड्रोन, रॉकेट और पारंपरिक मिसाइलों का इस्तेमाल कर चुका है और अब और अधिक उन्नत व खतरनाक तकनीकों की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में भारत को सतर्क रहने के साथ-साथ अपनी रक्षा तैयारियों को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति “बेहद समस्याग्रस्त”
थरूर ने पाकिस्तान की आंतरिक राजनीतिक स्थिति को भी बेहद चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि वहां एक नाममात्र की नागरिक सरकार है, जबकि वास्तविक सत्ता पूरी तरह से सेना के हाथों में केंद्रित है। नीति निर्धारण में सेना की निर्णायक भूमिका का सीधा असर पाकिस्तान की विदेश नीति और क्षेत्रीय सुरक्षा दृष्टिकोण पर पड़ता है।
आर्थिक कमजोरी बन सकती है खतरे की वजह
आर्थिक मोर्चे पर भी शशि थरूर ने पाकिस्तान की कमजोर स्थिति की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की जीडीपी वृद्धि दर लगभग 2 प्रतिशत है, जबकि भारत की विकास दर 7 प्रतिशत या उससे अधिक बनी हुई है। यह आर्थिक अस्थिरता भविष्य में पाकिस्तान को जोखिम भरे और आक्रामक कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकती है।
साथ ही उन्होंने चेताया कि पाकिस्तान अब कपड़ा और कृषि जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है, जहां भारत पहले से ही मजबूत स्थिति में है। इससे क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा और तनाव बढ़ सकता है।
बांग्लादेश की स्थिति भी चिंता का विषय
शशि थरूर ने पड़ोसी देश बांग्लादेश की स्थिति पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वहां ऊर्जा संकट, बढ़ती महंगाई और निवेशकों के घटते भरोसे जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच संभावित रक्षा सहयोग भारत के लिए चिंता का विषय है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बांग्लादेश अस्थिर होता है, तो यह भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लिए एक “सॉफ्ट अंडरबेली” बन सकता है, जिससे सुरक्षा चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
राष्ट्रीय एकता और सतर्क नीति की जरूरत
कुल मिलाकर, शशि थरूर ने राष्ट्रीय एकता, मजबूत और सतर्क विदेश नीति तथा पड़ोसी देशों की बदलती रणनीतियों पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका यह बयान इस बात का संकेत है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर देशहित में एकजुट होना समय की मांग है।
नितिन सिंह/ वीबीटी न्यूज/27 दिसंबर 2025
