संवाददाता/दीपेंद्र सिंह की रिपोर्ट
पादूकलां(नागौर) । फाल्गुनी मेले के तृतीय दिन श्याम मंदिर में भक्ति, श्रद्धा और उल्लास का अनुपम संगम देखने को मिला। वैदिक मंत्रोच्चार, मंगलमय आरती और “जय श्री श्याम” के गूंजते जयकारों के बीच बाबा श्याम को दिव्य छप्पन भोग अर्पित किया गया। मंदिर परिसर में सजे 56 प्रकार के व्यंजनों की आकर्षक और सुव्यवस्थित झांकी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बनी रही।

प्रातःकालीन आरती के उपरांत मंदिर कमेटी के सदस्यों और पुजारियों ने विधि-विधान से छप्पन भोग अर्पित किया। रंग-बिरंगी सजावट और सुसज्जित थालियों में सजे व्यंजनों की छटा देखते ही बन रही थी। लड्डू, पेड़ा, बर्फी, इमरती, जलेबी, गुलाब जामुन, मोहनथाल, मालपुआ, रसगुल्ला, घेवर, काजू कतली, बेसन लड्डू और नारियल बर्फी जैसे पारंपरिक मिष्ठान्न श्रद्धाभाव से सजाए गए थे। इसके साथ ही चूरमा, सूजी व आटे का हलवा, खीर, रबड़ी, मठरी, कचौरी, सेव, पापड़ी, नमकीन मिश्रण, दाल-बाती, पूड़ी-सब्जी, पंचमेवा और विभिन्न मौसमी फलों सहित कुल 56 व्यंजन अर्पित किए गए।
भोग की सजी दिव्य झांकी के दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। महिलाएं, पुरुष और युवा भक्त अनुशासन के साथ अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और जयकारों से वातावरण पूर्णतः भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने बाबा श्याम के चरणों में नमन कर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।
भोग आरती के पश्चात छप्पन भोग का प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया गया। हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर स्वयं को धन्य महसूस किया। स्वयंसेवकों ने सेवाभाव से प्रसाद वितरण और व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाली, जिससे आयोजन सुव्यवस्थित और शांतिपूर्ण रूप से संपन्न हुआ।
श्याम मंदिर कमेटी के अध्यक्ष श्याम सुंदर दाधीच ने बताया कि फाल्गुनी मेले के अवसर पर छप्पन भोग अर्पित करना वर्षों पुरानी परंपरा है। यह आयोजन क्षेत्र की समृद्धि और जनकल्याण की भावना से किया जाता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भक्तों की आस्था और सहयोग से ही ऐसे भव्य आयोजन संभव हो पाते हैं।
दिनभर मंदिर परिसर में छप्पन भोग की चर्चा और दर्शन का उत्साह बना रहा। भक्तों के चेहरे पर श्रद्धा और संतोष की झलक स्पष्ट दिखाई दे रही थी। फाल्गुनी मेले के इस पावन अवसर पर श्याम बाबा के प्रति अटूट आस्था ने एक बार फिर भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
