January 15, 2026
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जयपुर। राजस्थान में बहुचर्चित सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा रद्द होने के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भर्ती परीक्षा निरस्त होते ही शहीद स्मारक पर धरना दे रहे युवाओं के बीच खुशी की लहर दौड़ गई। वहीं, सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी युवाओं के साथ जश्न मनाते हुए डांस किया और कहा कि यह जीत बेरोजगार युवाओं और उनकी चार साल की मेहनत का परिणाम है।
हनुमान बेनीवाल ने कहा कि बीजेपी सरकार के कई मंत्री और अधिकारी नहीं चाहते थे कि यह भर्ती रद्द हो। लेकिन युवाओं की एकजुटता और लगातार संघर्ष के कारण न्यायालय को भी यह मानना पड़ा कि भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुई थीं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब कई नेता क्रेडिट लेने के लिए भागेंगे, जबकि हकीकत यह है कि संकट के समय कुछ लोग युवाओं को छोड़कर भाग गए थे और कुछ ही उनके साथ मजबूती से खड़े रहे।
बेनीवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि हाईकोर्ट का फैसला युवाओं के खिलाफ जाता तो हम दिल्ली कूच करने को तैयार थे। हमारी लड़ाई किसी पार्टी या नेता से नहीं बल्कि माफिया तंत्र के खिलाफ है, जो सरकारी भर्तियों में धांधली कर बेरोजगारों के भविष्य से खिलवाड़ करता है।
दूसरी ओर, जयपुर के शहीद स्मारक पर धरना दे रहे हजारों युवाओं ने भी कोर्ट के फैसले पर संतोष जताया। युवाओं ने कहा कि यह दिन उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। चार साल की लंबी लड़ाई आखिरकार रंग लाई है और आज बेरोजगारों की जीत हुई है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई तानाशाही और भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ थी, जिसमें आखिरकार सत्य की जीत हुई है।
इस बीच, राज्य सरकार में मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने भी कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि एसआई भर्ती परीक्षा में धांधली की शिकायतें लंबे समय से सामने आ रही थीं। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान इस भर्ती को लेकर हमने कई आंदोलन किए थे। कोर्ट के आदेश से साफ हो गया है कि युवाओं की आशंकाएं बिल्कुल सही थीं।
किरोड़ी ने दावा किया कि सरकार ने तो मात्र 58 फर्जी सब इंस्पेक्टरों का खुलासा किया था, लेकिन उनके पास मौजूद दस्तावेजों के आधार पर यह संख्या 50% से भी ज्यादा थी। अगर ऐसे लोग पुलिस सेवा में भर्ती हो जाते तो प्रदेश की कानून-व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं होता। ऐसे में हाईकोर्ट का निर्णय भले ही देर से आया हो, लेकिन बेहद ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण है।
फिलहाल, इस फैसले ने न केवल बेरोजगार युवाओं को राहत दी है बल्कि सरकार और राजनीतिक दलों को भी एक बड़ा संदेश दिया है कि पारदर्शिता और ईमानदारी से ही भर्तियां होंगी। एसआई भर्ती रद्द होने का असर अब आगामी भर्तियों और राजनीतिक समीकरणों पर भी साफ तौर पर दिखाई देगा।

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