संवाददाता – डी. डी. चारण / मेड़ता सिटी।
विश्व मानव अधिकार दिवस पर सामाजिक जागरूकता और मानवीय संवेदना का प्रेरणादायक उदाहरण पेश करते हुए किरण क्रांति फाउंडेशन ने शहर की झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों के बीच शिक्षा का उजाला फैलाने का अनोखा प्रयास किया। फाउंडेशन की ओर से भीख माँगने वाले और कचरा बीन कर अपना जीवन यापन करने वाले बच्चों के हाथों में किताबें और गरम कपड़े सौंपे गए।
इस विशेष अवसर पर फाउंडेशन की निदेशक डॉ. किरण देवल ने सभी से आह्वान किया कि “आइए संकल्प लें कि हम वंचित वर्ग को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर वास्तविक मानव अधिकारों की स्थापना करेंगे।”
झुग्गियों में पहुंची ‘शिक्षा की रोशनी’
गुलाबी नगरी की विभिन्न बस्तियों में रहने वाले इन बच्चों का जीवन अक्सर अभावों और संघर्षों से घिरा रहता है। कई बच्चे भीख मांगते हैं, तो कई कचरा बीनकर परिवार की मदद करते हैं। ऐसे मासूम हाथों में किताबें देखकर हर किसी का मन भावुक हो उठा।
किरण क्रांति फाउंडेशन ने न केवल किताबें और कपड़े वितरित किए बल्कि इन बच्चों के लिए एक अस्थायी पाठशाला भी संचालित की जा रही है। इस पाठशाला में नियमित रूप से बच्चों को बुनियादी शिक्षा, नैतिक मूल्यों और स्वच्छता के प्रति जागरूकता सिखाई जाती है।
शिक्षा, चिकित्सा और मूलभूत सुविधाओं पर विशेष फोकस
इस अवसर पर डॉ. किरण देवल ने बताया कि संस्था लगातार उन गरीब और जरूरतमंद बच्चों के लिए कार्य कर रही है जो शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
उन्होंने कहा —
“हर बच्चे को शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन का अधिकार है। हमारा लक्ष्य है कि इन बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें एक सुरक्षित एवं उज्ज्वल भविष्य दिया जाए। यह न केवल हमारा सामाजिक उत्तरदायित्व है, बल्कि यह हमारा मानव धर्म भी है।”
संस्थान द्वारा इन बच्चों के लिए समय-समय पर स्वास्थ्य जांच, स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम, पोषण वितरण तथा आत्म-विकास संबंधी गतिविधियाँ भी आयोजित की जाती हैं।
स्थानीय लोगों ने की पहल की सराहना
कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के कई लोग, अभिभावक और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। बच्चों के चेहरे पर खिली मुस्कान ने कार्यक्रम को और भी विशेष बना दिया। स्थानीय लोगों ने फाउंडेशन के इस प्रयास की जमकर सराहना की और कहा कि इस प्रकार की पहलें समाज में वास्तविक परिवर्तन लाने की क्षमता रखती हैं।
विश्व मानव अधिकार दिवस का वास्तविक संदेश
इस कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि मानव अधिकार केवल शब्दों तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि इन्हें जमीन पर उतारना ही वास्तविक मानवता है।
किरण क्रांति फाउंडेशन की यह पहल समाज में यह संदेश देती है कि यदि हर संस्था, हर व्यक्ति अपनी संवेदना और कर्तव्य को समझकर आगे आए तो कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा और हर हाथ में किताब होगी, कटोरा नहीं।
नितिन सिंह/ वीबीटी न्यूज/ 10 दिसंबर 2025
