January 15, 2026
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ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान में बढ़ा तनाव

हाल ही में भारत द्वारा संचालित ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई नाकाम रही, क्योंकि भारत की उन्नत हवाई रक्षा प्रणाली ने उसकी हर कोशिश को विफल कर दिया।

कौन-कौन से देश आए पाकिस्तान के समर्थन में?

इस अंतरराष्ट्रीय तनाव के दौरान भारत को वैश्विक स्तर पर व्यापक समर्थन मिला, लेकिन कुछ देशों ने पाकिस्तान का साथ भी दिया।
इनमें मुख्य रूप से चीन, तुर्किए और अजरबैजान का नाम सामने आया। चीन और तुर्किए ने जहां पाकिस्तान को सैन्य सहायता दी, वहीं अजरबैजान ने सीधे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ को समर्थन पत्र भेजा

अजरबैजान के रुख से भारत में गुस्सा क्यों?

भारत में अजरबैजान के प्रति लोगों का गुस्सा इसलिए भी अधिक है, क्योंकि यह देश भारत की प्राचीन संस्कृति से जुड़ा हुआ रहा है
अजरबैजान की राजधानी बाकू में स्थित है एक प्राचीन हिंदू मंदिर – आतेशगाह, जिसे ज्वाला मंदिर भी कहा जाता है।
यह मंदिर भारत और अजरबैजान के ऐतिहासिक सांस्कृतिक संबंधों का जीवंत प्रमाण है।


बाकू के प्राचीन मंदिर में मौजूद है संस्कृत श्लोक

साल 2018 में भारत की तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज जब इस मंदिर में गई थीं, तो उनकी एक तस्वीर काफी वायरल हुई थी।
तस्वीर में वे मंदिर के सामने हाथ जोड़कर खड़ी थीं और वहां एक ज्वाला धधक रही थी, जो सनातन परंपरा में अग्नि आराधना का प्रतीक मानी जाती है।
मंदिर की दीवारों पर संस्कृत में लिखे श्लोक आज भी स्पष्ट देखे जा सकते हैं, जो भारतीय संस्कृति की मौजूदगी का प्रमाण देते हैं।


क्यों खास है आतेशगाह मंदिर?

आतेशगाह फारसी शब्द है, जिसमें ‘आतिश’ का अर्थ आग और ‘गाह’ का अर्थ स्थान होता है।
इसका अर्थ हुआ – “अग्नि का निवास स्थान”
यह मंदिर सुराख़ानी शहर में स्थित है और इसे 17वीं से 18वीं सदी के बीच बनाया गया माना जाता है।
इसका पंचभुजा (पेंटागनल) आकार सनातन धर्म के यज्ञ कुंड और शक्ति यंत्रों की याद दिलाता है।
इस मंदिर में एक केंद्रीय अग्निकुंड है और चारों ओर छोटे-छोटे कक्ष हैं, जिनका प्रयोग साधकों और सन्यासी उपासकों द्वारा किया जाता था।


सनातन परंपरा और अजरबैजान का संबंध

इस मंदिर में अग्नि पूजा, गणेश पूजा और संस्कृत शिलालेख अजरबैजान की सनातन संस्कृति से जुड़ाव को दर्शाते हैं।
गणेश जी को “गणों के स्वामी”, “शुभारंभ के देवता” के रूप में पूजा जाता है।
यह तथ्य यह सिद्ध करता है कि सनातन परंपरा सिर्फ भारत तक सीमित नहीं बल्कि एशिया और मध्य एशिया तक फैली हुई थी।
ऐसे में अजरबैजान का पाकिस्तान का समर्थन करना भारतवासियों को खटकता है।


इतिहास में झांके तो…

  • 1883 के बाद इस मंदिर में पूजा बंद हो गई क्योंकि इस क्षेत्र में तेल और गैस का दोहन शुरू हो गया था।
  • 1975 में इसे म्यूज़ियम में बदल दिया गया और 2007 में इसे ऐतिहासिक धरोहर घोषित किया गया।
  • आज यह मंदिर हजारों देशी-विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है।

भारत में बढ़ रही है बहिष्कार की मांग

अजरबैजान के इस कदम के बाद भारत में इस देश के खिलाफ पर्यटन और व्यापार के बहिष्कार की मांग उठ रही है।
सोशल मीडिया पर #BoycottAzerbaijan जैसे ट्रेंड देखने को मिल रहे हैं।
लोग सवाल कर रहे हैं कि अगर किसी देश में भारतीय संस्कृति का इतना गहरा प्रभाव रहा है, वहां के लोग सनातन प्रतीकों को सहेज कर रखे हैं, तो वह देश कैसे पाकिस्तान जैसे आतंक को समर्थन देने वाले देश के साथ खड़ा हो सकता है?


क्या अब भारत को करनी चाहिए नई विदेश नीति की समीक्षा?

इस पूरे घटनाक्रम ने भारत के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है – क्या भारत को अपनी विदेश नीति में बदलाव करना चाहिए?
क्या ऐसे देशों से सांस्कृतिक जुड़ाव होने के बावजूद रणनीतिक रूप से दूरी बनाना बेहतर होगा, जो भारत के विरोधियों का समर्थन करते हैं?


 विरासत एक ओर, वर्तमान राजनीति दूसरी ओर

बाकू का आतेशगाह मंदिर इस बात का प्रतीक है कि भारत की संस्कृति कितनी विशाल और दूर तक फैली हुई थी।
लेकिन वर्तमान राजनीति इन ऐतिहासिक संबंधों पर भारी पड़ रही है।
भारत को अब यह तय करना होगा कि वह इतिहास और विरासत के नाम पर आंखें मूंदे, या फिर वर्तमान के आधार पर अपने रुख को सख्त करे


लेखक: नितिन / वीबीटी

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