रिपोर्टर – डी.डी. चारण, मेड़ता सिटी
मेड़ता सिटी: रैन बसेरा समिति के सक्रिय सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता जितेन्द्र गहलोत ने हाल ही में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) श्वाति शर्मा से शिष्टाचार भेंट की। इस मुलाकात में गहलोत ने जिले में संचालित रैन बसेरों की व्यवस्थाओं, उनकी उपयोगिता और आम जन तक उनकी पहुंच को लेकर विस्तार से चर्चा की।
जितेन्द्र गहलोत ने बताया कि जिले में चल रहे रैन बसेरों का निरीक्षण करने के बाद यह महसूस हुआ कि इन आश्रय स्थलों की जानकारी और पहुंच अभी भी जरूरतमंद लोगों तक सीमित है। उन्होंने सचिव श्वाति शर्मा को सुझाव दिया कि अधिक जन-जागरूकता अभियान चलाकर और स्थानीय सामाजिक संस्थाओं की मदद से इन सुविधाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाया जा सकता है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्वाति शर्मा ने चर्चा के दौरान कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की महत्त्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इसके लिए विधिक सेवा प्राधिकरण भरसक प्रयासरत है और भविष्य में भी आमजन की सहायता के लिए सभी संसाधनों का उपयोग किया जाएगा। साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर दिए गए दिशा-निर्देशों की अनुपालना आवश्यक है, ताकि सामाजिक ताने-बाने को मजबूत किया जा सके और विधिक सहायता की पहुंच सभी तक सुनिश्चित हो सके।
इस अवसर पर स्थाई लोक अदालत के सदस्य एडवोकेट विमलेश व्यास भी मौजूद रहे। उन्होंने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और सेवाओं पर प्रकाश डाला और आगामी समय में आम नागरिकों को इन योजनाओं के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाने की बात कही। व्यास ने बताया कि सरकार की ओर से नागरिकों के लिए अनेक लाभकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं, परंतु जानकारी के अभाव में वे लाभार्थियों तक नहीं पहुँच पा रहीं। ऐसे में जन-जागरूकता को प्राथमिकता देते हुए क्रियान्वयन की दिशा में ठोस कदम उठाना आवश्यक है।
इस महत्वपूर्ण चर्चा और मुलाकात के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता रविन्द्र कुमार गहलोत भी उपस्थित रहे। उन्होंने भी सामाजिक सरोकारों और विधिक जागरूकता के लिए समाज के सभी वर्गों की भागीदारी को ज़रूरी बताया।
इस मुलाकात को सामाजिक दृष्टिकोण से अहम माना जा रहा है, जिससे न केवल रैन बसेरों की व्यवस्थाओं में सुधार की संभावना है बल्कि आम जन को विधिक सेवाओं का भी समुचित लाभ मिल सकेगा।