नागौर जिले में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए शुक्रवार का दिन एक ऐतिहासिक क्षण लेकर आया। जिले के पांच ट्रांसजेंडर में से तीन को जिला कलक्ट्रेट सभागार में एक विशेष समारोह के दौरान आधिकारिक पहचान प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। इस आयोजन की अध्यक्षता जिला कलक्टर श्री अरुण कुमार पुरोहित ने की, जिन्होंने अपने हाथों से ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को यह महत्वपूर्ण दस्तावेज सौंपे।
यह प्रमाण-पत्र सिर्फ एक पहचान दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए सामाजिक समावेश, सम्मान और सरकारी कल्याण योजनाओं तक पहुंच का प्रतीक बन गया है। इस अवसर पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के उप निदेशक श्री किशनाराम लोल भी उपस्थित थे, जिन्होंने इस प्रक्रिया की जानकारी दी।
प्रमाण-पत्र के लिए आवेदन की प्रक्रिया
श्री किशनाराम लोल ने बताया कि नागौर जिले की सपना भाटी, रागिनी, काजू कंवर, परी गुजरी और रूबी ने ट्रांसजेंडर प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। भारत सरकार के ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों की रक्षा) अधिनियम 2019 और संबंधित नियमों के तहत इन आवेदनों की छानबीन की गई और नियमानुसार सभी दस्तावेजों और प्रक्रियाओं को पूरा करने के पश्चात इन्हें यह पहचान पत्र जारी किए गए।
उल्लेखनीय है कि इस प्रक्रिया में आत्म-पहचान के अधिकार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को उनकी पहचान के साथ गरिमा पूर्वक जीवन जीने का अवसर देना है।
ट्रांसजेंडर सोशल एक्टिविस्ट नूर शेखावत की भूमिका
इस प्रक्रिया में ट्रांसजेंडर समुदाय की जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता नूर शेखावत की सक्रिय भूमिका रही। नूर शेखावत ने वर्षों से ट्रांसजेंडर अधिकारों के लिए संघर्ष किया है और सरकार के विभिन्न विभागों के समक्ष इस समुदाय की समस्याओं को लगातार उठाती रही हैं। उन्होंने बताया कि यह प्रमाण-पत्र इस समुदाय के लिए “नया जीवन” है, जो उन्हें समान अधिकारों और सम्मान के साथ जीने में मदद करेगा।
भावनाओं का सैलाब
जब तीन ट्रांसजेंडर – सपना, रागिनी और काजू – को प्रमाण-पत्र सौंपे गए, तो उनके चेहरों पर आत्म-सम्मान और खुशी की झलक साफ देखी जा सकती थी। एक भावुक क्षण में सपना भाटी ने कहा, “आज पहली बार ऐसा लग रहा है कि हमें समाज में हमारी एक पहचान मिली है। यह प्रमाण-पत्र हमारे संघर्ष और अस्तित्व को मान्यता देने का प्रतीक है।”
रागिनी ने इसे “स्वतंत्रता का दस्तावेज” बताया, जबकि काजू कंवर ने कहा कि अब वे बिना किसी झिझक के सरकारी दफ्तरों और संस्थानों में जा सकेंगी।
सरकारी योजनाओं तक पहुंचेगा लाभ
इस प्रमाण-पत्र के माध्यम से ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को अब केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:
- शिक्षा: प्रमाण-पत्र के साथ अब ट्रांसजेंडर छात्र स्कूल, कॉलेज और उच्च शिक्षा संस्थानों में आवेदन कर सकते हैं। इसके साथ ही वे छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए भी पात्र हो गए हैं।
- मतदान का अधिकार: अब प्रमाण-पत्र धारक ट्रांसजेंडर व्यक्ति मतदाता पहचान पत्र के लिए आवेदन कर सकते हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित कर सकते हैं।
- आवास और भूमि योजनाएं: राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं में ट्रांसजेंडर समुदाय को विशेष वरीयता मिलेगी। भूखंड आवंटन में दो प्रतिशत आरक्षण भी इस समुदाय को दिया जाएगा, जिससे वे अपने लिए स्थायी आवास की दिशा में कदम बढ़ा सकें।
- खाद्य सुरक्षा योजनाएं: खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा ट्रांसजेंडर समुदाय को एकल महिला के समकक्ष मानते हुए 2 रुपये प्रति किलो गेहूं उपलब्ध कराया जाएगा। यह निर्णय उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाने की दिशा में अहम कदम है।
सामाजिक समावेश की ओर बढ़ता समाज
यह पहल सिर्फ प्रमाण-पत्र देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में ट्रांसजेंडर समुदाय की स्वीकृति, आत्मसम्मान और भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम है। सरकार द्वारा दी गई यह मान्यता उन्हें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से मुख्यधारा में लाने की दिशा में प्रभावशाली साबित होगी।
आज जब पूरा देश समानता और समावेश की ओर बढ़ रहा है, तब नागौर जैसे शहर में इस प्रकार की पहल यह दर्शाती है कि बदलाव सिर्फ महानगरों में नहीं, बल्कि छोटे जिलों में भी आ रहा है।
आगे की राह
यह तो शुरुआत है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और सरकारी अधिकारियों का मानना है कि आने वाले समय में और भी ट्रांसजेंडर व्यक्ति इस प्रक्रिया से जुड़ेंगे और अपनी पहचान स्थापित करेंगे। नूर शेखावत ने कहा कि उनकी टीम लगातार इस दिशा में काम कर रही है कि जिले के हर ट्रांसजेंडर को इस प्रमाण-पत्र की जानकारी मिले और वे इसके लिए आवेदन करें।
यह घटना न सिर्फ नागौर जिले के लिए बल्कि पूरे राजस्थान और भारत के लिए एक प्रेरणा है। ट्रांसजेंडर समुदाय को उनका हक और पहचान देना हमारे संविधान और मानवीय मूल्यों की सच्ची सेवा है। इस ऐतिहासिक कदम से ना सिर्फ इन व्यक्तियों का जीवन बदलेगा, बल्कि समाज का दृष्टिकोण भी बदलने लगेगा।
लेखक: Vaibhav Time News Team