January 15, 2026
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रिपोर्ट: डी. डी. चारण, मेड़ता सिटी 

मेड़ता नगर पालिका में इन दिनों अध्यक्ष पद को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पालिका अध्यक्ष गौतम टाक की बर्खास्तगी के बाद से यह पद खाली पड़ा है, और पिछले एक सप्ताह से नगर पालिका के कार्य लगभग ठप्प हो गए हैं। आमजन अपने रोजमर्रा के कामों को लेकर परेशान हैं, लेकिन राजनीतिक दांव-पेच के चलते अभी तक इस पद पर कोई नियुक्ति नहीं हो पाई है।

नगर विकास एवं स्वायत्त शासन विभाग (डीएलबी) द्वारा अभी तक नए पालिका अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं किया गया है। इस देरी के पीछे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आंतरिक मतभेदों को मुख्य कारण माना जा रहा है। भाजपा के भीतर चल रहे अंदरूनी विरोध और गुटबाजी के चलते अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका है।


पालिका के कामकाज पर बुरा असर

पालिका अध्यक्ष की कुर्सी खाली रहने से नगर पालिका के प्रशासनिक कार्यों पर बड़ा असर पड़ा है।

  1. आमजन के काम रुके: पट्टों के मामलों में अनियमितता के कारण न्यायिक जांच चल रही है, और इस बीच बगैर अध्यक्ष के पालिका से जुड़े कई आवश्यक कार्य लंबित हो गए हैं।
  2. निर्माण कार्य ठप: नगर विकास से संबंधित कई योजनाओं पर काम रुक गया है, जिससे स्थानीय निवासियों में असंतोष बढ़ रहा है।
  3. कर्मचारियों का असमंजस: प्रशासनिक स्तर पर भी फैसलों में देरी हो रही है, जिससे सरकारी कर्मचारियों में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
  4. राजनीतिक अस्थिरता: पालिका अध्यक्ष पद के खाली रहने से राजनीतिक माहौल गरमा गया है, और विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने गुटों को मजबूत करने में जुटे हुए हैं।

गौतम टाक की बर्खास्तगी और उसका असर

पूर्व पालिका अध्यक्ष गौतम टाक को पट्टों के मामलों में अनियमितता के आरोपों में दोषी पाए जाने के बाद डीएलबी द्वारा बर्खास्त किया गया था। उनकी बर्खास्तगी के बाद से ही पालिका प्रशासन में अस्थिरता बनी हुई है। भाजपा नेतृत्व अब तक उनके स्थान पर नए अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं कर पाया है, जिससे नगर की जनता में नाराजगी बढ़ रही है।

इससे पहले जब गौतम टाक को निलंबित किया गया था, तो भाजपा ने पवन परतानी को अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया था। परतानी ने अध्यक्ष बनने के बाद पूर्व पालिकाध्यक्ष रामसुख मुंशी समेत पांच पार्षदों को भाजपा में शामिल कर पार्टी को मजबूत किया था।

लेकिन इस बार भाजपा में अंदरूनी कलह के चलते नए अध्यक्ष की नियुक्ति लटक गई है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, पार्टी में चल रही खींचतान के कारण भाजपा अभी तक इस मुद्दे पर कोई एकराय नहीं बना सकी है।


नए अध्यक्ष की नियुक्ति में देरी, भाजपा की किरकिरी

नगर पालिका अध्यक्ष की नियुक्ति में हो रही देरी से भाजपा की छवि को नुकसान पहुंच रहा है। स्थानीय स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

  • शहर में चर्चा का बाजार गर्म: भाजपा की आंतरिक कलह और पालिका में हो रही राजनीति के कारण शहर में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
  • स्थानीय नेतृत्व की नाकामी: भाजपा का स्थानीय नेतृत्व अब तक नए अध्यक्ष की नियुक्ति करवाने में असमर्थ रहा है, जिससे जनता के बीच पार्टी की छवि प्रभावित हो रही है।
  • विपक्ष को मिला मुद्दा: कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस स्थिति का पूरा फायदा उठा रहे हैं और भाजपा की गुटबाजी को उजागर करने में लगे हुए हैं।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भाजपा ने जल्द ही इस मसले को नहीं सुलझाया, तो पार्टी को आगामी चुनावों में भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।


कब होगी नियुक्ति? डीएलबी पर भी सवाल

नगर विकास एवं स्वायत्त शासन विभाग (डीएलबी) द्वारा अब तक नए पालिका अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं किया गया है। स्थानीय भाजपा नेता इस नियुक्ति में तेजी लाने के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन पार्टी के आंतरिक मतभेद इसमें सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं।

कुछ राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, अगले कुछ दिनों में डीएलबी की ओर से नया आदेश जारी किया जा सकता है, लेकिन यह भी स्पष्ट नहीं है कि भाजपा का कौन सा गुट इस नियुक्ति से संतुष्ट होगा।


क्या होगा आगे?

नए पालिका अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा जल्द ही अपनी गुटबाजी को खत्म कर एकमत नहीं हुई, तो यह मामला और लंबा खिंच सकता है।

नगर की जनता को अब इस राजनीतिक अनिश्चितता के जल्द खत्म होने की उम्मीद है, ताकि नगर पालिका के रुके हुए कार्य फिर से शुरू हो सकें और शहर का विकास प्रभावित न हो।

अब देखने वाली बात यह होगी कि भाजपा अपनी अंदरूनी कलह को सुलझाकर कब तक नए अध्यक्ष की नियुक्ति कर पाती है।

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