मुरलीधर सोनी की रिपोर्ट
नागौर जिले के रियाँबड़ी उपखंड मुख्यालय पर चारभुजानाथ मित्र मंडली के तत्वावधान में इशर गणगौर की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। बैंड-बाजों के साथ पारंपरिक स्वरूप में निकली इस सवारी ने पूरे कस्बे को भक्ति और उत्साह से भर दिया। महिलाओं और बच्चों सहित सैकड़ों श्रद्धालु इस धार्मिक आयोजन में भाग लेने पहुंचे। शोभायात्रा का शुभारंभ चारभुजानाथ मंदिर से हुआ और यह कस्बे के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होकर बाग परिसर में समाप्त हुई।

शोभायात्रा की भव्यता
यह शोभायात्रा शाही अंदाज़ में निकली, जिसमें दस घोड़ों पर मातृ शक्ति की भव्य झलक देखने को मिली। इस दौरान श्रद्धालुओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर भाग लिया और पूरे क्षेत्र में धार्मिक आस्था और भक्ति का माहौल बन गया। सवारी के आगे-आगे बैंड-बाजे की धुन पर भक्त नाचते-गाते चले, जिससे कस्बे में उल्लास का संचार हो गया।
महिलाओं ने की विशेष पूजा-अर्चना
शोभायात्रा के बाग परिसर पहुंचने पर महिलाओं ने विधि-विधान से इशर गणगौर की पूजा-अर्चना की। उन्होंने अपने पति की लंबी उम्र और परिवार में सुख-समृद्धि की कामना करते हुए मंगल गीत गाए। गणगौर पर्व राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर का एक अभिन्न हिस्सा है, जिसमें विवाहित महिलाएं अपने सुहाग की लंबी उम्र और अविवाहित युवतियां अच्छे वर की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करती हैं। इस दौरान सुहागिन महिलाओं ने विशेष पारंपरिक वेशभूषा में गणगौर माता की आराधना की।

सरपंच ने की अगुवाई, सैकड़ों श्रद्धालु रहे मौजूद
इस भव्य आयोजन में सरपंच ने इशर गणगौर की अगुवाई की, जिससे आयोजन की भव्यता और अधिक बढ़ गई। कस्बे के गणमान्य नागरिकों और श्रद्धालुओं ने शोभायात्रा का भरपूर आनंद लिया। इस धार्मिक यात्रा में बद्रीलाल सोनी, श्यामसुंदर रुणवाल, जगदीश रुणवाल, रामकिशोर तिवाड़ी, ममता, मीना कुमारी, चंचल, प्रेमलता सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
गणगौर पर्व का विशेष महत्व
गणगौर राजस्थान के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जो विशेष रूप से महिलाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पर्व पर महिलाएं उपवास रखती हैं और 16 दिनों तक गणगौर माता की पूजा करती हैं। इसके बाद गणगौर की मूर्तियों को शोभायात्रा के रूप में विसर्जित किया जाता है। यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि समाज में आपसी भाईचारे और संस्कृति को भी प्रोत्साहित करता है।
श्रद्धालुओं में उत्साह और भक्ति का माहौल
इशर गणगौर की इस भव्य सवारी के दौरान पूरा कस्बा भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने भक्ति गीत गाए और पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए। चारभुजानाथ मित्र मंडली के सदस्यों ने आयोजन की व्यवस्था को संभाला और पूरे कस्बे को गणगौर महोत्सव के रंग में रंग दिया।

इशर गणगौर की शोभायात्रा ने पूरे कस्बे में भक्ति और उत्साह का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को प्रकट किया, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक धरोहर को भी प्रोत्साहित किया। राजस्थान की परंपराओं और संस्कृति को जीवंत बनाए रखने वाले ऐसे आयोजन समाज को एक नई ऊर्जा और उमंग प्रदान करते हैं।