राजस्थान शिक्षक आंदोलन 2 जून 2025
जयपुर(गौतम नोगिया की रिपोर्ट ) — राजस्थान के शिक्षकों की वर्षों से चली आ रही मांगों को लेकर अब आर-पार की लड़ाई का बिगुल बज चुका है। शिक्षक संघ शेखावत राजस्थान के नेतृत्व में प्रदेशभर के शिक्षक 2 जून को राजधानी जयपुर स्थित शहीद स्मारक पर एकजुट होकर एक विशाल धरना-प्रदर्शन करने जा रहे हैं। यह ऐतिहासिक आंदोलन प्रदेश की शिक्षक नीतियों में परिवर्तन की मांग और गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
धरने का उद्देश्य: 11 सूत्रीय मांगों के समर्थन में जनजागरण
मीडिया प्रभारी विनोद पूनिया ‘कशिश’ ने जानकारी देते हुए बताया कि यह आंदोलन शिक्षक संघ शेखावत राजस्थान की प्रांतीय कार्यकारिणी के आह्वान पर आयोजित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षकों की स्थानांतरण नीति में पारदर्शिता, गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति, संविलियन, पदोन्नति प्रक्रिया में तेजी सहित अन्य 11 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है।
इस धरने के पीछे महीनों की योजना और मेहनत है, और यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव की मांग है।
नावां से निकला पैदल जत्था, बना संघर्ष की प्रतीक यात्रा
नागौर जिले के नावां से 6 दिन पूर्व शुरू हुई पैदल यात्रा अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुकी है। यह जत्था आज यानी 1 जून को जयपुर के झोटवाड़ा से प्रस्थान कर बनी पार्क होते हुए 2 जून को शहीद स्मारक पहुंचेगा। वहां एक विशाल सभा और धरना प्रदर्शन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रदेशभर से शिक्षक शामिल होंगे।
इस पदयात्रा का नेतृत्व कर रहे हैं नावां पैदल जत्था संयोजक अर्जुन लोमरोङ, जिनके सानिध्य में पूरे राज्य से आए शिक्षक प्रतिनिधि निरंतर पदयात्रा में सहभागी बनते जा रहे हैं। इस जत्थे में हर जिले की भागीदारी इस बात का संकेत है कि यह आंदोलन अब व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामूहिक चेतना की आवाज बन चुका है।
प्रदेश स्तरीय नेतृत्व कर रहे हैं यह प्रमुख पदाधिकारी:
धरना प्रदर्शन में भाग लेने वाले प्रमुख पदाधिकारी इस प्रकार हैं:
- हेमंत खराड़ी – प्रदेश उपाध्यक्ष
- भोमाराम गोयल – प्रांतीय प्रतिनिधि
- चेतन राजपुरोहित – प्रांतीय प्रतिनिधि
- राधेश्याम यादव – जयपुर जिलाध्यक्ष
- घनश्याम सिंह चारण – नागौर जिला मंत्री
- प्रकाश चंद ओझा – उपसभाध्यक्ष
- मणीलाल मालीवाड़ – डूंगरपुर जिलाध्यक्ष
- धनराज खराड़ी – मंत्री
- जयपाल बुरङक – चित्तौड़गढ़ जिलाध्यक्ष
- विनोद पूनिया ‘कशिश’ – बालोतरा मंत्री
- दिलीप बिरङा – संगठन सदस्य
- विजय डूकिया – जिलाध्यक्ष
- मोहम्मद यासीन – भीलवाड़ा जिलामंत्री
- बजरंग लाल सोहू – ब्लॉक अध्यक्ष डेगाना
- धन्नाराम टाडा – वरिष्ठ उपाध्यक्ष
- शिवजी राम महिया, रामनिवास कड़वा, शिवलाल डूडी, राजकुमार डसानिया, नानूराम गोदारा – लाडनूं ब्लॉक अध्यक्ष
डेगाना से भी विशेष प्रतिनिधिमंडल पहुंचेगा आंदोलन स्थल
डेगाना ब्लॉक से संरक्षक सुरेश डूडी के नेतृत्व में शिक्षकों का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल 2 जून को शहीद स्मारक पहुंचेगा और इस निर्णायक क्षण में अपनी भागीदारी निभाएगा। यह दल शिक्षक संघर्ष की एकता का प्रतीक बनेगा।
घनश्याम सिंह चारण का राज्य के शिक्षकों से आह्वान
नागौर जिला मंत्री घनश्याम सिंह चारण ने प्रदेशभर के शिक्षकों से अपील करते हुए कहा,
“अब समय आ गया है कि हम अपने हक की लड़ाई खुद लड़ें। हमें सरकार को यह स्पष्ट संदेश देना है कि हम सिर्फ chalk और duster तक सीमित नहीं हैं, हम नीति निर्धारण में भी आवाज उठाना जानते हैं।”
चारण ने शिक्षकों से 2 जून को जयपुर में आयोजित धरने में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस जनआंदोलन को मजबूती देने की अपील की है।
क्या हैं शिक्षक संघ की मुख्य मांगें?
संघ की 11 सूत्रीय मांगों में प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- स्थानांतरण नीति में पारदर्शिता और नियमित प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।
- शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से पूरी तरह मुक्त किया जाए।
- लंबित पदोन्नतियाँ शीघ्र की जाएं।
- संविदा शिक्षकों का संविलियन किया जाए।
- विद्यालयों में संसाधनों की समुचित उपलब्धता सुनिश्चित हो।
- शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को प्रभावी रूप से लागू किया जाए।
- महिला शिक्षकों को विशेष स्थानांतरण सुविधा दी जाए।
- विषयवार शिक्षकों की समुचित नियुक्ति हो।
- डीए व वेतन विसंगतियाँ दूर की जाएं।
- विद्यालय समय और परीक्षा नीति में शिक्षकों की राय ली जाए।
- शिक्षकों को सम्मानजनक सेवा शर्तें दी जाएं।
शिक्षक एकता का प्रतीक बन रहा यह आंदोलन
आज का यह आंदोलन केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार की मांग का प्रतीक है। शिक्षक, जो देश का भविष्य गढ़ते हैं, आज अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। लेकिन इस बार संघर्ष भी एकजुट है और संकल्प भी अडिग।
क्या कहती है सरकार?
फिलहाल सरकार की ओर से इस आंदोलन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन शिक्षकों की इतनी बड़ी संख्या में राजधानी में एकत्र होने से सरकार पर दबाव बनना तय है।
शिक्षा को मजबूती देने की मांग
शिक्षक संघ शेखावत राजस्थान का यह आंदोलन सिर्फ शिक्षकों के हक की लड़ाई नहीं, बल्कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने का एक निर्णायक क्षण है। यह धरना एक जनआंदोलन में तब्दील होता जा रहा है और यदि सरकार ने अब भी ध्यान नहीं दिया, तो यह चिंगारी भविष्य में ज्वाला बन सकती है।
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