संवाददाता/गिरधारी प्रजापत
नागौर जिले के थांवला गांव से एक ऐसी प्रेरणादायक पहल सामने आई है, जिसने समाज में व्याप्त दहेज प्रथा के खिलाफ एक मजबूत संदेश दिया है। थांवला निवासी मनीष प्रजापत और रामपुरा के राजेन्द्र प्रजापत ने परंपरागत दिखावे और लेन-देन को पूरी तरह नकारते हुए मात्र ₹1 और एक नारियल में विवाह संपन्न कर समाज के सामने एक आदर्श प्रस्तुत किया है।

यह विवाह सादगी, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है। थांवला से जब बारात जोधपुर पहुंची, तो इस अनोखी और सादगीपूर्ण शादी ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। बिना बैंड-बाजे के शोर, बिना भव्य सजावट और बिना फिजूल खर्च के सम्पन्न इस विवाह ने यह साबित कर दिया कि शादी का असली अर्थ दो परिवारों और दो व्यक्तियों के बीच विश्वास और समझ का रिश्ता होता है, न कि धन का प्रदर्शन।
दुल्हन के पिता पांचाराम प्रजापति (छोटी पादू, रियां बड़ी क्षेत्र) ने भी इस पहल का खुले दिल से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि दहेज जैसी कुप्रथा समाज के लिए अभिशाप बन चुकी है और इसे खत्म करने के लिए ऐसे साहसी कदम बेहद जरूरी हैं। उनका मानना है कि यदि हर परिवार इस सोच को अपनाए, तो आने वाले समय में दहेज प्रथा पूरी तरह समाप्त हो सकती है।
इस विवाह की एक और खास बात यह रही कि छोटे दूल्हे ने भी अपने बड़े साढ़ू से प्रेरणा लेते हुए केवल ₹1 और नारियल ही स्वीकार किया। यह कदम इस बात का प्रतीक है कि बदलाव की शुरुआत छोटे स्तर से भी की जा सकती है और धीरे-धीरे यह एक बड़े सामाजिक आंदोलन का रूप ले सकती है।
मनीष प्रजापत, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में कार्यरत हैं, ने अपने इस फैसले से यह संदेश दिया कि शिक्षित और जागरूक युवा ही समाज में वास्तविक परिवर्तन ला सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिश्तों की नींव दहेज नहीं, बल्कि प्रेम, सम्मान और संस्कार होने चाहिए।
इस अनूठे विवाह की क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और आम लोगों ने जमकर सराहना की। सोशल मीडिया पर भी इस पहल को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। लोगों ने इसे एक नई सोच और नई दिशा की शुरुआत बताया।
आज के दौर में जहां शादियों में लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, वहीं थांवला की यह शादी सादगी और सामाजिक सुधार की मिसाल बनकर सामने आई है। यह पहल न केवल दहेज प्रथा के खिलाफ एक मजबूत संदेश देती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करती है कि वे परंपराओं को समझदारी और संवेदनशीलता के साथ अपनाएं।
यह विवाह समाज के लिए एक आईना है, जो दिखाता है कि बदलाव संभव है—बस जरूरत है सही सोच और साहसिक कदम उठाने की।
