जयपुर। राजधानी जयपुर के जमवारामगढ़ क्षेत्र से एक गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया, जहां मंगलवार देर रात दो मासूम बच्चियों—जिनकी उम्र महज 5 और 8 वर्ष है—का बाल विवाह कराए जाने की तैयारी चल रही थी। दोनों बच्चियों की शादी क्रमशः 9 और 11 साल के लड़कों के साथ तय की गई थी। यह पूरा घटनाक्रम तब सामने आया जब किसी जागरूक व्यक्ति ने इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दी।
सूचना मिलते ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला प्रशासन, पुलिस और बाल संरक्षण इकाइयों की संयुक्त टीम तत्काल हरकत में आई। प्रशासन को आशंका थी कि परिजन शादी रुकने के डर से निर्धारित तिथि से पहले ही फेरे करवा सकते हैं। यही वजह रही कि अधिकारियों ने बिना देरी किए मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की।
जमवारामगढ़ के न्यायिक अधिकारी के अवकाश पर होने के कारण लिंक मजिस्ट्रेट हुमा कौहरी ने इस मामले में त्वरित निर्णय लेते हुए अपने निवास पर ही बाल विवाह निषेधाज्ञा आदेश पारित किया। इसके बाद प्रशासनिक टीम जयपुर से सरजौली गांव पहुंची, जहां दोनों परिवारों को समझाइश दी गई और सख्त चेतावनी भी दी गई कि बाल विवाह कानूनन अपराध है।
मौके पर पहुंची टीम ने न केवल शादी की तैयारियों को रुकवाया, बल्कि परिजनों को बाल विवाह के दुष्परिणामों और कानूनी प्रावधानों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए दोनों शादियों को तत्काल प्रभाव से रुकवा दिया गया।
कार्रवाई के बाद दोनों नाबालिग बच्चियों को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) को सौंप दिया गया। कोर्ट के आदेशानुसार अब इन बच्चियों को बालिका गृह में सुरक्षित रखा जाएगा, जहां उनकी देखभाल, शिक्षा और संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।
प्रशासन ने दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में दोबारा इस तरह का प्रयास किया गया तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी कहा कि बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ समाज के सभी वर्गों को मिलकर जागरूकता फैलानी होगी, ताकि मासूम बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके।
यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि बाल विवाह जैसी कुरीतियां आज भी समाज में कहीं-न-कहीं मौजूद हैं। हालांकि प्रशासन की सतर्कता और समय पर की गई कार्रवाई से इस बार दो बच्चियों का भविष्य अंधकार में जाने से बच गया। जरूरत है कि ऐसे मामलों में समाज भी आगे आए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को दे, ताकि समय रहते प्रभावी कदम उठाए जा सकें।
नितिन सिंह| 29 अप्रैल 2026
