कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने भारतीय राजनीति के इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया है। दशकों के इंतजार और कड़े संघर्ष के बाद, भारतीय जनता पार्टी (BJP) राज्य में दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता की दहलीज पर खड़ी है। इस ‘ऐतिहासिक’ सत्ता परिवर्तन के बीच पार्टी के दिग्गज नेता और मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय मीडिया से बात करते हुए अपने जज्बातों को काबू में नहीं रख पाए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
कार्यकर्ताओं के बलिदान को याद कर छलके आंसू
कैलाश विजयवर्गीय, जिन्होंने 2021 के चुनाव में बंगाल के केंद्रीय प्रभारी के रूप में जमीन पर मोर्चा संभाला था, जीत की खबर सुनकर काफी भावुक नजर आए। उन्होंने रुंधे हुए गले से कहा:
“यह जीत केवल सीटों की जीत नहीं है, बल्कि उन हजारों कार्यकर्ताओं के बलिदान का प्रतिफल है जिन्होंने टीएमसी शासन के दौरान भीषण प्रताड़ना झेली। हमारे कार्यकर्ताओं की हत्याएं हुईं, मुझ पर और संघ के प्रचारकों पर झूठे गैर-जमानती मामले दर्ज किए गए, लेकिन बंगाल की जनता ने आज लोकतंत्र को बचा लिया है।”
विजयवर्गीय ने याद दिलाया कि कैसे बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हिंसा और डर के साये में भी संगठन का झंडा थामे रखा। उन्होंने इस जीत को उन “शहीद” कार्यकर्ताओं के चरणों में समर्पित किया जिन्होंने ‘सोनार बांग्ला’ का सपना देखा था।
“सुरक्षा कवच” और राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा
मीडिया से चर्चा के दौरान विजयवर्गीय ने इस चुनावी जीत को अनुच्छेद 370 के खात्मे और CAA लागू करने जैसे ऐतिहासिक फैसलों के बराबर बताया। उन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बंगाल “देश विरोधी गतिविधियों का अड्डा” बन चुका था।
आंतरिक सुरक्षा: उन्होंने दावा किया कि बंगाल सीमा पार से होने वाली तस्करी, नकली मुद्रा और आतंकवाद का गेटवे बन गया था।
मोदी-शाह की रणनीति: विजयवर्गीय ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी का नेतृत्व और गृह मंत्री अमित शाह की अचूक रणनीति ने देश को सबसे बड़ा सुरक्षा कवच दिया है। अब बंगाल की सीमाएं सुरक्षित होंगी और देश विरोधी तत्वों का सफाया होगा।”
भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण के युग का अंत
बीजेपी नेता ने स्पष्ट किया कि यह जनादेश केवल एक राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि बंगाल की संस्कृति को बचाने की लड़ाई थी। उन्होंने कहा कि जनता ने तुष्टिकरण की राजनीति और भ्रष्टाचार के खिलाफ वोट दिया है। बंगाल के लोगों ने संदेश दे दिया है कि अब यहाँ केवल विकास और कानून का राज चलेगा।
‘सोनार बांग्ला’ का संकल्प
कैलाश विजयवर्गीय ने विश्वास जताया कि नई सरकार के शपथ लेते ही बंगाल में अराजकता खत्म होगी और उद्योग-धंधों के लिए रास्ते खुलेंगे। 2026 के ये नतीजे न केवल बीजेपी के लिए संजीवनी हैं, बल्कि पूर्वी भारत की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत भी हैं।
