भवानीपुर । पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक ऐसा भूचाल आया है जिसने सत्ता के गलियारों को हिलाकर रख दिया है। राज्य की सबसे हाई-प्रोफाइल मानी जाने वाली भवानीपुर विधानसभा सीट के नतीजों ने सबको चौंका दिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दिग्गज नेता और नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक कड़े मुकाबले में 15,114 मतों के अंतर से पराजित कर दिया है।
यह जीत इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि सुवेंदु अधिकारी ने लगातार दूसरी बार ममता बनर्जी को चुनावी मैदान में शिकस्त दी है। इससे पहले 2021 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने नंदीग्राम की चर्चित जंग में ममता बनर्जी को हराया था।
काउंटिंग सेंटर पर हाई-वोल्टेज ड्रामा
मतगणना की शुरुआत से ही भवानीपुर में मुकाबला बेहद दिलचस्प बना हुआ था। शुरुआती राउंड्स में कभी टीएमसी तो कभी बीजेपी आगे निकल रही थी, लेकिन दोपहर होते-होते सुवेंदु अधिकारी ने निर्णायक बढ़त बना ली।
जश्न का माहौल: जैसे ही सुवेंदु की जीत की आधिकारिक पुष्टि के संकेत मिले, बीजेपी कार्यकर्ताओं ने ‘जय श्री राम’ के नारों और अबीर-गुलाल के साथ जश्न मनाना शुरू कर दिया।
ममता बनर्जी का वॉकआउट: हार की आहट मिलते ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मतगणना केंद्र से बाहर निकल गईं। उनके चेहरे पर निराशा साफ देखी जा सकती थी।
ममता बनर्जी के गंभीर आरोप: “मेरे साथ धक्का-मुक्की हुई”
परिणाम घोषित होने से पहले ही केंद्र से बाहर निकलीं ममता बनर्जी ने चुनाव प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि:
“मतगणना केंद्र के भीतर का माहौल डरावना था। मेरे साथ धक्का-मुक्की की गई और मारपीट जैसी स्थिति पैदा की गई। यह लोकतंत्र की हत्या है।”
ममता बनर्जी ने इस पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोबारा मतगणना (Recounting) की मांग की है। टीएमसी के आला नेता भी अब इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं।
सुवेंदु बने बंगाल के ‘जायंट किलर’
सुवेंदु अधिकारी की इस जीत ने बंगाल बीजेपी में उनके कद को और ऊंचा कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नंदीग्राम के बाद अब भवानीपुर में ममता को हराना यह साबित करता है कि बंगाल की जनता का मूड बदल रहा है। सुवेंदु ने इस जीत को “जनता की जीत” और “अहंकार की हार” करार दिया है।
आगे क्या? गरमाएगी बंगाल की सियासत
इस हार के बाद ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री पद और उनकी राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। वहीं, धांधली और मारपीट के आरोपों ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में बंगाल की सड़कों से लेकर सदन तक सियासी टकराव बढ़ने के पूरे आसार हैं।
