संवाददाता | रक्षा चौहान
पादूकलां। प्रतिभा किसी संसाधन की मोहताज नहीं होती, यह बात पादूकलां की होनहार बेटी सुमन कड़वासड़ा ने एक बार फिर साबित कर दी है। सीमित संसाधनों, सरकारी विद्यालय में शिक्षकों की कमी और सामान्य पारिवारिक परिस्थितियों के बावजूद सुमन ने अपनी अथक मेहनत, अनुशासन और मजबूत इरादों के बल पर RE-NEET 2026 परीक्षा में OBC श्रेणी में ऑल इंडिया रैंक 3064 प्राप्त कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उनकी इस शानदार सफलता से पादूकलां सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में खुशी और गर्व का माहौल है।
सुमन के पिता अमराराम कड़वासड़ा हैं। परिवार में चार भाई-बहन हैं और सभी ने अपनी प्रारंभिक एवं स्कूली शिक्षा सरकारी विद्यालयों से प्राप्त की है। सुमन ने भी अपनी पढ़ाई महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय, पादूकलां से पूरी की। विद्यालय में शिक्षकों की कमी जैसी चुनौतियाँ होने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने नियमित स्वाध्याय, समयबद्ध अध्ययन और आत्मविश्वास के साथ तैयारी जारी रखी, जिसका परिणाम आज पूरे क्षेत्र के सामने प्रेरणादायक उदाहरण बनकर आया है।
सुमन की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत में निरंतरता हो और खुद पर विश्वास बना रहे, तो कठिन से कठिन परिस्थितियाँ भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकतीं। उन्होंने यह उपलब्धि केवल अपने परिवार का ही नहीं, बल्कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले हजारों विद्यार्थियों का भी आत्मविश्वास बढ़ाया है। उनकी कहानी उन छात्रों के लिए प्रेरणा है जो संसाधनों के अभाव को अपनी कमजोरी मान लेते हैं।
अपनी सफलता पर सुमन ने कहा कि उन्होंने हमेशा अनुशासित दिनचर्या अपनाई और पढ़ाई में निरंतरता बनाए रखी। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और परिवार के सहयोग को देते हुए कहा कि उनके विश्वास और मार्गदर्शन ने उन्हें हर कठिनाई से लड़ने की ताकत दी। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि यदि मन में दृढ़ संकल्प हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।
सुमन की इस उपलब्धि पर पादूकलां क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और शुभचिंतकों ने सुमन व उनके परिवार को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। लोगों का कहना है कि सुमन ने यह साबित कर दिया कि सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थी भी राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं और बड़े से बड़ा मुकाम हासिल कर सकते हैं।
सुमन कड़वासड़ा की यह सफलता केवल एक परीक्षा में बेहतर रैंक हासिल करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, मेहनत, आत्मविश्वास और सपनों को साकार करने की प्रेरक मिसाल है। उनकी उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने तथा उन्हें पूरा करने का नया हौसला देगी।
