नई दिल्ली। भारत ने एक बार फिर अपनी रक्षा ताकत का प्रदर्शन करते हुए लंबी दूरी की परमाणु-सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण कर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी Defence Research and Development Organisation (डीआरडीओ) द्वारा ओडिशा तट से किए गए इस परीक्षण को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि सरकार या डीआरडीओ की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञ इसे अग्नि-6 या अग्नि-5 के उन्नत संस्करण से जोड़कर देख रहे हैं।
रक्षा सूत्रों के अनुसार यह मिसाइल इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) श्रेणी की हो सकती है। यदि यह दावा सही साबित होता है तो भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा जिनके पास अत्याधुनिक आईसीबीएम तकनीक मौजूद है। वर्तमान में अमेरिका, रूस, चीन और उत्तर कोरिया जैसे देशों के पास ही इस प्रकार की लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता है।
इस परीक्षण के बाद पाकिस्तान और चीन में रणनीतिक हलचल बढ़ गई है। पाकिस्तान समर्थित कई रक्षा वेबसाइटों ने दावा किया है कि भारत की बढ़ती मिसाइल क्षमता दक्षिण एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के सामरिक संतुलन को बदल सकती है। पाकिस्तान की सबसे बड़ी चिंता यह मानी जा रही है कि भारत ऐसी मिसाइल तकनीक विकसित कर रहा है, जिसकी पहुंच हजारों किलोमीटर दूर तक हो सकती है और जिसे रोकना बेहद कठिन होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक ईरान द्वारा हाल में इस्तेमाल की गई मिसाइलों से कहीं अधिक आधुनिक और सटीक मानी जाती है। जहां कई देशों को लक्ष्य भेदने के लिए एक साथ अनेक मिसाइलें दागनी पड़ती हैं, वहीं भारत की उन्नत मिसाइलें एक ही वार में लक्ष्य को सटीकता से भेदने में सक्षम मानी जा रही हैं। यही वजह है कि भारतीय मिसाइल प्रणाली को दुनिया की सबसे भरोसेमंद रणनीतिक प्रणालियों में गिना जाता है।
जानकारी के अनुसार भारत ने परीक्षण से पहले लगभग 3500 किलोमीटर का NOTAM जारी किया था, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह परीक्षण किसी रणनीतिक लंबी दूरी की मिसाइल से जुड़ा हुआ था। सोशल मीडिया पर बांग्लादेश के कई लोगों द्वारा साझा किए गए वीडियो में आकाश में तेज गति से गुजरती मिसाइल जैसी वस्तु दिखाई दी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी गति मैक-5 से अधिक हो सकती है, जो इसे हाइपरसोनिक श्रेणी के करीब ले जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी मिसाइलें केवल युद्ध क्षमता का प्रदर्शन नहीं बल्कि रणनीतिक संदेश भी होती हैं। माना जा रहा है कि भारत की यह तैयारी मुख्य रूप से चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और दो मोर्चों पर संभावित खतरे को ध्यान में रखकर की जा रही है। चीन लगातार हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है, वहीं पाकिस्तान के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी भी भारत के लिए चुनौती बनी हुई है।
अग्नि श्रृंखला की मिसाइलें पहले ही लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता साबित कर चुकी हैं। यदि भारत अग्नि-6 जैसी उन्नत आईसीबीएम तकनीक विकसित करने में सफल हो जाता है तो यह देश की सामरिक ताकत को नई ऊंचाई पर पहुंचाने वाला कदम माना जाएगा।
