नई दिल्ली । भारत ने भविष्य के युद्धों को ध्यान में रखते हुए अपनी सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान ने एक विशाल ‘ड्रोन फोर्स’ तैयार करने की दिशा में तेजी से काम शुरू कर दिया है। यह फोर्स किसी भी सैन्य संघर्ष की स्थिति में “फर्स्ट रेस्पोंडर” के रूप में काम करेगी और दुश्मन पर सबसे पहले सटीक जवाबी हमला करने में सक्षम होगी।
रक्षा सूत्रों के अनुसार यह नई ड्रोन फोर्स आधुनिक डेटा नेटवर्क, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और कॉग्निटिव वारफेयर सिस्टम से लैस होगी। इसके जरिए दुश्मन की गतिविधियों पर रीयल-टाइम नजर रखी जा सकेगी और बेहद सटीक हमले किए जाएंगे। भारत अब युद्ध के पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर हाईटेक और मल्टी-डोमेन वॉरफेयर की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
इंटीग्रेटेड रक्षा मुख्यालय के मुताबिक फिलहाल करीब 50 हजार सैन्य कर्मियों को ड्रोन संचालन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और आधुनिक युद्ध तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अगले तीन वर्षों में देशभर में 15 नए ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित किए जाएंगे, जहां सैनिकों को सिम्युलेटर और वर्चुअल रियलिटी तकनीक के माध्यम से लाइव बैटल जैसी ट्रेनिंग दी जाएगी। भविष्य में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) को भी इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
भारतीय सेना की यह नई ड्रोन फोर्स इंटेलिजेंस, सर्विलांस और प्रिसीजन स्ट्राइक यानी सटीक हमलों की दोहरी भूमिका निभाएगी। इसे वायुसेना के इंटीग्रेटेड एयर कमांड और सेना के ‘आकाशतीर’ एयर डिफेंस सिस्टम का मजबूत सुरक्षा कवच भी मिलेगा।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ड्रोन फोर्स की अवधारणा उस समय और मजबूत हुई जब पाकिस्तान ने कथित रूप से करीब 1,000 ड्रोन के जरिए भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम की क्षमता और कमजोरियों को परखने की कोशिश की। इसके बाद सेना ने भविष्य की रणनीति तैयार करते हुए फैसला किया कि आने वाले समय में हर सैनिक के पास अपना ड्रोन होना चाहिए। इसी योजना के तहत सेना की प्रत्येक कोर में लगभग 8,000 ड्रोन शामिल किए जाएंगे। अनुमान है कि आने वाले वर्षों में भारत के पास एक लाख ड्रोन की विशाल सैन्य ताकत होगी।
भारत रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भी तेजी से आत्मनिर्भर बनता जा रहा है। देश का रक्षा उत्पादन अब 1.54 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। साथ ही तीनों सेनाओं के लिए थिएटर कमांड की तैयारी भी चल रही है। दुश्मन के सस्ते ड्रोन हमलों से निपटने के लिए भारत ‘सॉफ्ट किल’ तकनीक जैसे जैमिंग और स्पूफिंग के साथ ‘हार्ड किल’ तकनीक जैसे लेजर आधारित डायरेक्टेड एनर्जी वेपन का इस्तेमाल कर रहा है।
रक्षा क्षेत्र में स्टार्टअप और एमएसएमई की भूमिका भी लगातार बढ़ रही है। इस वर्ष करीब 120 नए डिफेंस स्टार्टअप शुरू हुए हैं, जिनमें से 20 कंपनियां ड्रोन, एआई और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तकनीकों पर काम कर रही हैं। भारत अब मिसाइलों के महत्वपूर्ण सेंसर और इंजन जैसे उपकरण भी स्वदेश में विकसित कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के युद्ध अंतरिक्ष, साइबर, समुद्र और जमीन—चारों मोर्चों पर एक साथ लड़े जाएंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत ऐसे एडवांस ड्रोन विकसित कर रहा है, जो बिना जीपीएस के भी काम कर सकें और जिन्हें जैम करना बेहद मुश्किल हो।
