जयपुर, 15 मई। राजस्थान आज देश में हरित ऊर्जा क्रांति का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। मुख्यमंत्री Bhajanlal Sharma ने राजस्थान एनर्जी कॉन्क्लेव 2026 में कहा कि “ऊर्जा की बचत ही ऊर्जा उत्पादन का सबसे सस्ता, प्रभावी और स्थायी विकल्प है।” उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि देश और समाज को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाना है तो संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और ईंधन की बचत को जनआंदोलन बनाना होगा।
जयपुर में आयोजित राजस्थान एनर्जी कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज राजस्थान सौर ऊर्जा उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य बन चुका है और आने वाले वर्षों में ऊर्जा प्रदाता राज्य के रूप में अपनी नई पहचान स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोतों में राजस्थान के पास असीम संभावनाएं हैं और प्रदेश तेजी से ग्रीन एनर्जी हब बन रहा है।

ईवी से पहुंचे मुख्यमंत्री, दिया ग्रीन एनर्जी का संदेश
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) से पहुंचे। उनके इस कदम को ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में एक प्रेरक संदेश माना गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की बचत केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। ईंधन की एक-एक बूंद बचाना राष्ट्रहित में जरूरी है।
उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने से कार्बन उत्सर्जन कम होगा, पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी और भविष्य की ऊर्जा चुनौतियों का समाधान भी संभव होगा। राज्य सरकार ई-मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर कार्य कर रही है।
“राजस्थान बनेगा देश का ऊर्जा पावरहाउस”
मुख्यमंत्री ने निवेशकों से राजस्थान में निवेश करने का आह्वान करते हुए कहा कि “पधारो म्हारे देश” केवल एक स्वागत संदेश नहीं बल्कि निवेश और विकास की नई संभावनाओं का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने में राजस्थान बड़ी भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार उद्योगों और निवेशकों को हर संभव सहयोग और अनुकूल वातावरण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य की प्रगतिशील नीतियों के कारण सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायो एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और पंप स्टोरेज परियोजनाओं में बड़े निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। यह राजस्थान की अर्थव्यवस्था के लिए नए युग की शुरुआत है।
अक्षय ऊर्जा उत्पादन में राजस्थान बना अग्रणी
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2030 तक देश में 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने और वर्ष 2070 तक नेट जीरो लक्ष्य प्राप्त करने का संकल्प लिया है। राजस्थान सरकार इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान में लगभग 828 गीगावाट सौर ऊर्जा और 284 गीगावाट पवन ऊर्जा उत्पादन की क्षमता मौजूद है। वर्तमान में राज्य में 47 गीगावाट से अधिक अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में 24 हजार 410 मेगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता की वृद्धि हुई है, जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।
राज्य सरकार ने अक्षय ऊर्जा, बायो फ्यूल, ऊर्जा भंडारण और ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए “राजस्थान एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति 2024” लागू की है। इसके माध्यम से निवेशकों को नई सुविधाएं और प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।
कुसुम योजना से किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत कृषि भूमि पर लघु सौर परियोजनाएं स्थापित की जा रही हैं। अब तक 4 हजार मेगावाट से अधिक की परियोजनाएं स्थापित हो चुकी हैं, जबकि 6500 मेगावाट की परियोजनाएं आवंटित की जा चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य में सरकारी और संयुक्त उपक्रमों द्वारा 4 हजार 670 मेगावाट क्षमता के सोलर पार्क स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 12 हजार मेगावाट से अधिक क्षमता के नए सोलर पार्क निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा 1000 से अधिक सरकारी भवनों पर सौर्यकरण का कार्य पूरा किया जा चुका है।
राज्य सरकार वर्चुअल और नेट मीटरिंग व्यवस्था के माध्यम से 600 मेगावाट क्षमता के सौर प्लांट स्थापित करने की योजना पर भी कार्य कर रही है।
प्रदेश में बनेंगे 250 ईवी चार्जिंग स्टेशन
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना के तहत राजस्थान में 250 स्थानों की पहचान की गई है, जहां इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इससे प्रदेश में ईवी वाहनों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और आमजन को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
उन्होंने कहा कि आने वाला समय ग्रीन एनर्जी और ई-मोबिलिटी का है। राजस्थान सरकार इस दिशा में मजबूत कदम उठा रही है ताकि प्रदेश को स्वच्छ, सुरक्षित और ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
ऊर्जा भंडारण बनेगा भविष्य की जरूरत
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक 115 गीगावाट अक्षय ऊर्जा और 10 गीगावाट ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य तय किया है। वहीं वर्ष 2047 तक इसे बढ़ाकर 290 गीगावाट तक पहुंचाने की योजना है।
उन्होंने बताया कि 6 हजार मेगावाट बैटरी स्टोरेज क्षमता का आवंटन पहले ही किया जा चुका है तथा 6400 मेगावाट की परियोजनाएं प्रक्रिया में हैं। ऊर्जा भंडारण भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का मजबूत आधार बनेगा।
ऊर्जा संरक्षण जनभागीदारी से ही संभव
ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) Hiralal Nagar ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर ऊर्जा संरक्षण और ईंधन बचत को जनआंदोलन बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सरकार फास्ट चार्जिंग स्टेशन, सोलर एनर्जी विस्तार और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कुसुम योजना जैसी दूरदर्शी योजनाओं के माध्यम से राजस्थान ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों और निवेशकों ने भी लिया भाग
कार्यक्रम में मुख्य सचिव V. Srinivas सहित ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ, निवेशक और विभिन्न उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कॉन्क्लेव में ग्रीन एनर्जी, ऊर्जा संरक्षण, निवेश और भविष्य की ऊर्जा तकनीकों पर विस्तृत चर्चा हुई।
