संवाददाता: चंद्रशेखर शर्मा, थांवला (नागौर)
थांवला कस्बे के लाखीना रोड स्थित नदी घाटा क्षेत्र में इन दिनों आवारा और पागल कुत्तों के आतंक से ग्रामीणों का जीना मुश्किल हो गया है। पिछले करीब 20 दिनों से पांच कुत्तों का एक झुंड लगातार गाय और भैंस के बच्चों पर हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार रहा है। ग्रामीणों के अनुसार अब तक 11 बछड़ों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य मवेशी गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि ये कुत्ते रात के अंधेरे में झुंड बनाकर खेतों, बाड़ों और घरों के आसपास बंधे मवेशियों पर हमला करते हैं। लगातार हो रहे हमलों के कारण पशुपालकों में भय का माहौल है। स्थिति यह हो गई है कि ग्रामीण अपने मवेशियों की सुरक्षा के लिए रातभर उनके पास खाट लगाकर पहरा देने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते इन कुत्तों पर नियंत्रण नहीं किया गया तो वे इंसानों, विशेषकर बच्चों, पर भी हमला कर सकते हैं। इससे पूरे क्षेत्र में चिंता का माहौल बना हुआ है।
इसी बीच बुधवार सुबह एक पालतू कुत्ता इन आवारा कुत्तों से बचने के प्रयास में खेत की ओर भागते समय एक कुएं में गिर गया। सूचना मिलने पर गौरक्षा दल थांवला की टीम मौके पर पहुंची और तत्परता दिखाते हुए सफल रेस्क्यू अभियान चलाकर कुत्ते को सुरक्षित बाहर निकाला।
गौरक्षा दल अध्यक्ष शैलेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि लगातार मवेशियों पर हमले हो रहे हैं और यदि यही स्थिति रही तो छोटे बच्चों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई कर आवारा कुत्तों के आतंक से ग्रामीणों को राहत दिलाने की मांग की।

रेस्क्यू के दौरान सुरेश सामरिया, दातार चौहान, प्रमोद जांगिड़, हिम्मत सिंह, सम्पत सिंह, राजू नायक, रवि भरोला, कानाराम कुमावत, भागूराम मावर, श्रवण मावर सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।
