नागौर | विशेष रिपोर्ट
देश में सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को समय पर और बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रधानमंत्री द्वारा 13 फरवरी 2026 को “पीएम राहत (सड़क दुर्घटना आपात उपचार) योजना” को मंजूरी मिलने के बाद अब इसे देशभर में तेजी से लागू किया जा रहा है। इस योजना के लागू होने से सड़क हादसों में घायल व्यक्तियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
इस योजना के तहत दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अधिकतम ₹1.5 लाख तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। यह सुविधा दुर्घटना के बाद पहले 7 दिनों तक मान्य रहेगी, जिसे चिकित्सा विशेषज्ञ “गोल्डन आवर” की दृष्टि से बेहद अहम मानते हैं। योजना का उद्देश्य यही है कि दुर्घटना के तुरंत बाद पीड़ित को बिना किसी आर्थिक बाधा के तत्काल उपचार मिल सके और उसकी जान बचाई जा सके।
यह योजना राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य मार्गों, शहरी सड़कों सहित सभी सार्वजनिक सड़कों पर लागू होगी। यानी देश के किसी भी हिस्से में सड़क दुर्घटना होने पर घायल व्यक्ति इस योजना का लाभ उठा सकेगा। योजना के संचालन के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा, जिससे इलाज की प्रक्रिया पारदर्शी, तेज और प्रभावी बन सके।
सरकार ने सभी राज्यों और जिलों को योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। नागौर जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जुगल किशोर सैनी के अनुसार, आयुष्मान भारत (PMJAY) से जुड़े सभी अस्पतालों को इस योजना में शामिल कर “Designated Hospitals” के रूप में कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। जिन अस्पतालों की आईडी निष्क्रिय है, उन्हें जल्द से जल्द सक्रिय करने को कहा गया है।
इसके अलावा, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों के आसपास स्थित गैर-PMJAY अस्पतालों को भी “PM राहत Only Hospitals” के रूप में जोड़ा जा रहा है। वहीं, जो अस्पताल सीधे इस योजना से जुड़े नहीं हैं, उन्हें भी दुर्घटना पीड़ितों को प्राथमिक उपचार देना अनिवार्य किया गया है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि किसी भी घायल व्यक्ति को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े।
जिला प्रशासन को भी अस्पतालों की भागीदारी सुनिश्चित करने और तय समय सीमा में प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए सभी चिकित्सा संस्थानों को TMS 2.0 सिस्टम एक्टिवेट करने को कहा गया है, साथ ही उपचार के लिए अलग से पैकेज लिस्ट भी जारी कर दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने में मील का पत्थर साबित हो सकती है। समय पर उपचार मिलने से हजारों लोगों की जान बचाई जा सकेगी।
