नागौर, 29 मई। कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर के कुलगुरु प्रोफ़ेसर वी. एस. जेतावत ने कृषि विज्ञान केंद्र आठियासन, नागौर में आयोजित दो दिवसीय भेड़ एवं बकरी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा बीज विक्रय कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों एवं पशुपालकों को वैज्ञानिक पशुपालन, आधुनिक कृषि तकनीकों और गुणवत्तायुक्त बीजों के महत्व के प्रति जागरूक करना रहा।
अपने संबोधन में कुलगुरु प्रोफ़ेसर जेतावत ने कहा कि वर्तमान समय में पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का प्रभावी माध्यम बनता जा रहा है।
उन्होंने पशुपालकों से वैज्ञानिक पद्धति से भेड़ एवं बकरी पालन अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि पशुओं के नियमित टीकाकरण, संतुलित आहार और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से उत्पादन क्षमता में वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने कहा कि यदि किसान खेती के साथ पशुपालन को जोड़कर कार्य करें तो उनकी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव है।
इस अवसर पर प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. एस. आर. कुमावत ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि और पशुपालन एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने किसानों को पारंपरिक खेती के साथ पशुपालन गतिविधियों को अपनाने की सलाह दी ताकि अतिरिक्त आय के स्रोत विकसित किए जा सकें। उन्होंने बताया कि सरकार एवं कृषि विश्वविद्यालय किसानों को उन्नत तकनीकों और प्रशिक्षण के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं।
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र आठियासन के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. गोपीचंद सिंह ने किसानों को संतुलित उर्वरकों के उपयोग की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने और बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के लिए उर्वरकों का संतुलित एवं वैज्ञानिक तरीके से उपयोग बेहद आवश्यक है।
वहीं पशुपालन वैज्ञानिक बुधाराम चौधरी ने बकरियों में होने वाले विभिन्न रोगों, उनके लक्षणों और रोकथाम के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने पशुपालकों को समय-समय पर टीकाकरण कराने और पशुओं की नियमित स्वास्थ्य जांच करवाने की सलाह दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों को पशुपालन में आधुनिक प्रबंधन तकनीकों की भी जानकारी दी गई।
इसके अलावा डॉ. एच. आर. चौधरी ने किसानों को गुणवत्तायुक्त बीजों की उपलब्धता एवं उनके उपयोग से होने वाले लाभों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अच्छी गुणवत्ता वाले बीज कृषि उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में गृह विज्ञान विषय विशेषज्ञ डॉ. भावना शर्मा सहित बड़ी संख्या में किसान एवं पशुपालक उपस्थित रहे।
दो दिवसीय इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों और पशुपालकों को भेड़ एवं बकरी पालन, रोग प्रबंधन, पोषण, उन्नत कृषि तकनीकों और गुणवत्तायुक्त बीजों के उपयोग से संबंधित व्यवहारिक जानकारी दी जाएगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्र के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनने में सहायता मिल सकेगी।
