मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और वैश्विक तेल-गैस संकट के बीच जहां दुनिया अनिश्चितता से जूझ रही है, वहीं भारत अपनी आर्थिक रणनीति को मजबूती देने में तेजी से आगे बढ़ रहा है। दक्षिण कोरिया, जर्मनी और यूरोपीय संघ के साथ अहम व्यापारिक समझौतों के बाद अब भारत एक और बड़ा कदम उठाने जा रहा है। भारत और न्यूजीलैंड के बीच 27 अप्रैल 2026 को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर होने जा रहे हैं, जो दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई दिशा देगा।
इस समझौते को न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने अपने देश के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है। मार्च 2025 से चल रही बातचीत अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। लक्सन का मानना है कि इस समझौते के बाद न्यूजीलैंड के निर्यातकों के लिए भारत का विशाल 140 करोड़ उपभोक्ताओं वाला बाजार खुल जाएगा। खास बात यह है कि न्यूजीलैंड में कुछ मतभेदों के बावजूद विपक्षी दलों ने भी इस समझौते का समर्थन किया है, जो इसकी अहमियत को दर्शाता है।
यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट केवल वस्तुओं के आयात-निर्यात तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निवेश, सेवाओं और तकनीकी सहयोग को भी नई गति देगा। न्यूजीलैंड से भारत को ऊन, लोहा, इस्पात, एल्युमीनियम, फल-मेवे और लकड़ी का गूदा निर्यात किया जाएगा। वहीं भारत से न्यूजीलैंड को फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी, कीमती पत्थर और टेक्सटाइल का निर्यात बढ़ेगा। इससे दोनों देशों के उद्योगों को नए अवसर मिलेंगे और रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में भी दोनों देशों के रिश्ते मजबूत होते नजर आ रहे हैं। भारत के चंद्रयान-3 मिशन में न्यूजीलैंड की एक टेलीकम्युनिकेशन कंपनी की चिप्स का उपयोग किया गया था, जो इस साझेदारी की गहराई को दर्शाता है। आने वाले समय में यह सहयोग और भी मजबूत हो सकता है, खासकर स्पेस, आईटी और इनोवेशन के क्षेत्रों में।
आंकड़ों की बात करें तो भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 1.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 49 प्रतिशत की बड़ी वृद्धि है। भारत का निर्यात भी 32 प्रतिशत बढ़कर 711 मिलियन डॉलर हो गया है। वहीं सर्विस सेक्टर, खासकर यात्रा और आईटी सेवाओं में भी भारत ने 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है।
इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के लागू होने के बाद व्यापार में और तेजी आने की उम्मीद है। इससे न केवल दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध मजबूत होंगे, बल्कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत की आर्थिक स्थिति और भी सुदृढ़ होगी। यह समझौता भारत की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह दुनिया के प्रमुख देशों के साथ मजबूत व्यापारिक रिश्ते बनाकर अपने आर्थिक भविष्य को सुरक्षित कर रहा है।
कुल मिलाकर, भारत और न्यूजीलैंड के बीच होने वाला यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दोनों देशों के लिए ‘विन-विन’ साबित हो सकता है, जो आने वाले वर्षों में व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के नए आयाम स्थापित करेगा।
-नितिन सिंह
