April 23, 2026
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मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईरान ने अपनी सुरक्षा नीति को और आक्रामक बना दिया है। हाल ही में ईरानी सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान सीमा के पास सक्रिय आतंकी संगठन जैश-अल-अदल (जिसे ईरान ‘जैश-अल-जुल्म’ कहता है) के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान चलाया। इस ऑपरेशन में करीब 20 आतंकियों के मारे जाने की खबर सामने आई है, जिसे ईरान अपनी आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से बड़ी सफलता मान रहा है।

ऑपरेशन का मकसद: सिर्फ हमला नहीं, रणनीतिक संदेश

ईरान की प्रमुख सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अनुसार, इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल आतंकियों को खत्म करना नहीं था, बल्कि संगठन की पूरी ऑपरेशनल क्षमता को कमजोर करना था। ईरान के लिए यह मिशन एक स्पष्ट संदेश है कि वह अपनी सीमाओं पर किसी भी तरह की आतंकी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगा।

ईरान-पाकिस्तान सीमा लंबे समय से संवेदनशील रही है, जहां छोटे-छोटे आतंकी समूह सक्रिय रहते हैं। ऐसे में यह कार्रवाई सीमा सुरक्षा मजबूत करने, आतंकवाद पर लगाम लगाने और देश के भीतर स्थिरता बनाए रखने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

कौन है जैश-अल-अदल?

जैश-अल-अदल एक सुन्नी उग्रवादी संगठन है, जो मुख्य रूप से ईरान के सिस्तान-बालूचिस्तान प्रांत में सक्रिय है। इसकी स्थापना सलाउद्दीन फारूकी ने की थी। यह संगठन ईरानी सुरक्षा बलों, खासकर IRGC के जवानों को निशाना बनाता रहा है।

इसका मुख्य एजेंडा ईरान के कुछ क्षेत्रों को अलग कर वहां बलूच शासन स्थापित करना है। 2012 में 10 ईरानी सैनिकों की हत्या के बाद यह संगठन पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था। तब से यह ईरान के लिए लगातार सिरदर्द बना हुआ है।

ईरान की बढ़ती चिंता: अंदरूनी अस्थिरता का खतरा

ईरान इस समय कई मोर्चों पर तनाव का सामना कर रहा है। ऐसे में देश के भीतर किसी भी तरह की अस्थिरता उसके लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। सरकार को डर है कि यदि ऐसे आतंकी संगठन सक्रिय रहे, तो वे आंतरिक विद्रोह को हवा दे सकते हैं।

युद्ध जैसी स्थिति में फंसे ईरान के लिए घरेलू शांति बनाए रखना बेहद जरूरी है। इसलिए वह ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाते हुए किसी भी आतंकी गतिविधि को शुरुआती स्तर पर ही खत्म करने की रणनीति पर काम कर रहा है।

2025-26 का घटनाक्रम और आगे की रणनीति

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2025 में जैश-अल-अदल ने अपनी ताकत बढ़ाने के लिए तीन छोटे आतंकी संगठनों के साथ गठजोड़ किया था। इससे इसकी मारक क्षमता और नेटवर्क दोनों मजबूत हुए।

ईरान की हालिया सैन्य कार्रवाई इसी बढ़ते खतरे का जवाब मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ईरान इस तरह के ऑपरेशनों को और तेज करेगा, ताकि किसी भी आतंकी नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके।

-नितिन सिंह 

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