संवाददाता | रक्षा चौहान
पादूकलां। कस्बे में पर्यावरण संरक्षण और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता का अनूठा संदेश देते हुए प्रधानमंत्री के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण एवं परिंडा वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश शासन के पूर्व प्राचार्य प्रो. मेहबूबअली गौरी के पादूकलां आगमन पर ग्रामीणों ने राजस्थानी परंपरा के अनुसार साफा पहनाकर एवं पुष्पमालाओं से भव्य स्वागत किया। सम्मान समारोह के साथ आयोजित इस कार्यक्रम ने पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रेरणादायी संदेश भी दिया।
कार्यक्रम के दौरान 11 पौधों का रोपण किया गया तथा बेजुबान पक्षियों के लिए 11 परिंडे वितरित किए गए। उपस्थित ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करेंगे और पक्षियों के लिए वर्षभर दाना-पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे, ताकि प्रकृति संरक्षण का यह अभियान केवल एक कार्यक्रम तक सीमित न रहकर जनभागीदारी का आंदोलन बने।
इस अवसर पर हाजी शमसुद्दीन गौरी ने कहा कि वर्षा ऋतु पौधारोपण के लिए सबसे उपयुक्त समय है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने घर, खेत, विद्यालय, सार्वजनिक स्थानों और श्मशान भूमि पर कम से कम एक पौधा लगाकर उसका संरक्षण करे तथा पक्षियों के लिए परिंडे लगाए, तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, हरित और संतुलित पर्यावरण मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि मानवता का सच्चा धर्म केवल इंसानों की सेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति और सभी जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशील होना भी उतना ही आवश्यक है।
मुख्य अतिथि प्रो. मेहबूबअली गौरी ने कहा कि “पेड़ लगाना जितना जरूरी है, उससे कहीं अधिक जरूरी उन्हें बचाना और उनका संरक्षण करना है। प्रकृति हमें जीवन देती है, इसलिए उसका संरक्षण हमारा नैतिक दायित्व है। एक पौधा आने वाले कल की शुद्ध हवा, छाया और जीवन का आधार है, जबकि एक परिंडा किसी प्यासे पक्षी के लिए जीवनदान के समान है।”
उन्होंने युवाओं से पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने, अधिक से अधिक पौधे लगाने, उनकी नियमित देखभाल करने तथा बेजुबान जीव-जंतुओं के प्रति दया, प्रेम और संवेदना का भाव विकसित करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने पर्यावरण संरक्षण, प्रकृति संवर्धन और हरियाली बढ़ाने का सामूहिक संकल्प लेते हुए अभियान को निरंतर आगे बढ़ाने का विश्वास दिलाया।
